गुरुवार, 13 अक्तूबर 2011

पढ़ने से माँ- बाप ने रोका

शीर्षक -पढ़ने से माँ -बाप ने रोका
वक्त के हालात ने रोका ,
हम को पढ़ने से माँ- बाप ने रोका .....
 जब पहली बार पढ़ने को कहाँ ,
 तब टाल दी मेरी मेरी बात .....
 बोले पढ़कर क्या करोगे ,
 सही नहीं हैं इस देश के हालात......
 एक -एक करके कट गए सभी दिन,
 जब पढ़ना था तब पढ़ न सका .......
 मेरी बातो को कोई समझ न सका ,
 हमको पढ़ने से माँ- बाप ने रोका .......
 लेखक - आशीष कुमार 
कक्षा - ९ अपना घर, कानपुर  



1 टिप्पणी:

sandhya ने कहा…

kaphi marmik kavita hai lekin jeevan me hamesha aashavan bane rahna chahiye so kavita ka ant bhi usi tarah hona chahiye.