शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

कविता मोर आया

मोर आया
देखो रंग बिरंगा मोर आता हैं |
बच्चे देखकर करते हैं शोर||
मोर आते हैं बच्चों के शोर से|
बच्चे देखकर करते शोर||
एक बच्चे ने मोर को पकड़ा|
बच्चे करने लागे लड़ाई झगडा||
लड़ाई झगडा मत करो|
मिल जुल कर रहे हम सब बच्चे||
लेखक चन्दन कक्षा अपना घर कानपुर

2 टिप्‍पणियां:

डॉ० डंडा लखनवी ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति- साधुवाद!
सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर पोस्ट!
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इसकी चर्चा यहाँ भी है-
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/07/9.html