मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

कविता: सरकार बनाम सामाजिक कार्यकर्ता

सामाजिक कार्यकर्ताओ का हाल...

समझ में आए,
इस देश की नीति।
जो दिलाये गरीब को इंसाफ,
उसकी बंद कर दी गई जुबान
करे जब वह कोई ऐसा काम,
जिससे लोगो को हो लाभ
सरकार गुस्साए कर दे भन्डा,
पुलिस आये जोर से मारे डंडा।
ले जाये पकड़ के अपने साथ,
फिर कर दे जेल के अन्दर।
जब जेल से छूटे वह बन्दा,
करे धरना और भूख हड़ताल
सरकार और अफसर हो गए लाल,
करने लगे जनता पर खूब अत्याचार।
जब भी जनता अन्याय पे आवाज उठाती,
पुलिस मारके डंडे ले जाये अपने साथ।
इतने से भी सरकार माने,
उसके ऊपर बंदूक है ताने।
झट उसको देशद्रोही बना दे,
कितने सारे मुकदमे करवा दे।
समझ में आये,
इस देश की नीति
जो दिलाये गरीब को इंसाफ ,
उसकी बंद कर दी गई जुबान

लेखक: अशोक कुमार, कक्षा , अपना घर

3 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

हाल फिलहाल का तो यही चित्र है...भारत का भविष्य आप बच्चे हैं जो इसकी तस्वीर बदलेंगे. अनेक शुभकामनाएँ.

माधव ने कहा…

ये आखे खोलने वाला है

kamlakar Mishra Smriti Sansthan ने कहा…

bilkul theek hai ye .......thanks