गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

कविता :काली रात

काली रात

अधेंरी काली रात थी
चूहों की बारात थी
बारात में चोर आये थे
चूहों को मार भगाए थे
जब चूहे वापस आये थे
साथ में अपनी फौज लाये थे
सब चोरों को मार भगाए थे
हलुआ पूड़ी खूब खाए थे ॥
अंधेरी काली रात थी
चूहों की बरात थी

लेखक :सागर कुमार
कक्षा :
अपना घर

2 टिप्‍पणियां:

Amitraghat ने कहा…

बढ़िया है......."

Suman ने कहा…

nice