गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

कविता :फाल्गुन का महीना बीता

फाल्गुन का महीना बीता

जब हम जागते सोकर
तब सूरज निकलता धूप लेकर
सूरज अपनी किरणों को ऐसे बिखेरता
जैसे होली में चारो ओर अबीर उड़ता
फाल्गुन का महीना बीता
अगली सुबह चैत्र का महीना सूरज लेकर आता
बैसाख के महीने में स्कूल बंद हो जाते
सब बच्चे गर्मी में मौज-मस्ती करते
शाम को सूरज ढलता
सारी किरणों को अपने संग में ले जाता
अगले दिन सूरज नयी सुबह लेकर आता
सब लोगों के मन की धूप खिलाता

लेखक : आशीष कुमार
कक्षा :
अपना घर

5 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

अरे वाह आशीष...हिन्दी महिनों के नाम भी सीखे हो..बहुत बढ़िया. ऐसे ही लिखते रहो और खूब ज्ञान पाओ और बांटों.

एक दिन मैं भी तुम लोगों के ब्लॉग पर अपनी कविता तुम लोगों के नाम देना चाहता हूँ..मुझे क्या करना पड़ेगा.

सब तुम लोगों से ही तो सीख रहा हूँ. जारी रहो.

JHAROKHA ने कहा…

Vah Asheesh----bahut sundar aur badhiya lagee apkee rachana---aise hee age bhee likhate rahiye.
Poonam

kamlakar Mishra Smriti Sansthan ने कहा…

ashish,shabas, bada acha laga padh kar.................

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

चर्चा मंच पर
प्यारे-प्यारे, मस्त नज़ारे!
शीर्षक के अंतर्गत
इस ब्लॉग की चर्चा की गई है!

--
संपादक : सरस पायस

शुभम जैन ने कहा…

bahut hi sundar kavita likhi aashish aapne...yu hi likhte rahiye...bahut achcha laga aapka blog...

shubhaashish...