समाज को मूरख कहतेये समाज है बुराइयों का ,
नहीं ठिकाना किसी की बात का .....
कौन सही है,कौन है गलत ,
नहीं किसी के पास कोई सबूत .....
सबूत है पर गवाह नहीं ,
जिन्दगी की राह पर किसी की कोई परवाह नहीं .....
जिसको नहीं है कोई परवाह ,
उसी को कहते हैं लापरवाह .....
लापरवाही करना हैं बहुत खराब ,
लोगों के पैसे चोरी कर लोग पीते हैं शराब .....
समझदार भी नासमझ की बाते करते ,
नहीं किसी के वो आगे झुकते .....
बाते करना है बहुत असान ,
पर ये पता नहीं की कैसे करें सभी का सम्मान .....
पता भी होता तो ये क्या करते ,
यही समाज को मूरख कहते .....
लेख़क :आशीष कुमार
कक्षा :८
अपना घर