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शुक्रवार, 30 मार्च 2012

कविता : न होती

 न होती 

न होती रात,न होते दिन ,
सुहावनी सुबह ....
सुहावने शाम ,
न होती गर्मियों की गर्मी....
 न होती जाड़ों की सर्दी ,
होता केवल बादलों का घेरा,
घोर काला घनघोर अन्धेरा ....
और होती बादलों से बारिश ,

लेखक : हंसराज कुमार 
कक्षा : 8
अपना घर  

सोमवार, 31 अक्टूबर 2011

कविता : जनता

 जनता 
भूख,बेरोजगारी और गरीबी,
झेल रही है जनता.....
फिर भी चुपचाप जिन्दगी का,
खेल,खेल रही है जनता.....
खुश हैं लूटने वाले,
और सो रही है जनता.....
पर वह दिन दूर नहीं,
जब-सब कुछ बदल जाएगा.....
तब एक ही नारा बोला जाएगा,
कमाने वाला खायेगा....
लूटने वाला ललचाएगा,

लेखक : हंसराज कुमार 
कक्षा : 8
अपना घर