बाल विवाह लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बाल विवाह लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 28 मार्च 2010

बाल विवाह आज भी जारी है

बचपन खोया सिंदूर के रंगों में ........

खेल खिलौने पढना लिखना,
सब छूटा इस बचपन
में ....
धमा चौकड़ी उछल कूद,
खोया सिंदूर के रंगों में....

हुई पराई सब अनजाना,
देखो मेरे इन आँखों में....
घर के चौके घर के चूल्हे,
खेल बने अब आँगन में ......
तुमसे बस इतना मै पुछू,
ये सजा दिया क्यों बचपन में

क्या लौटा पाओगे तुम ,
मुझको मेरे बचपन में....?????

महेश कुमार, अपना घर