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मंगलवार, 19 मई 2009

कविता: चिड़िया खाए पान की पुड़िया

चिड़िया खाए पान की पुड़िया
एक डाल पर बैठी चिड़िया ।
खाके पान की पुड़िया॥
तब आकर बोली एक बुढ़िया।
तुम क्या कर रही हो चिड़िया॥
बोली गुस्से में आकर चिड़िया ।
खाए बैठी हूँ पान की पुड़िया॥
प्यार से कहते मुझको गुड़िया।
दिखता नही क्या तुझको बुढ़िया॥
सुनकर चिड़िया की ऐठी बतियाँ।
गुस्से से फ़िर भर गई बुढ़िया ॥
बोली ले जाउंगी पकड़ के घर में।
तुझसे खाना बनावऊँगी चूल्हे में।।
चिड़िया बोली आसमान में उड़ जाउंगी।
पकड़ न मुझको तुम पाओगी।।
मुहँ बनके रह जाओगी।
खाली हाथ ही घर जाओगी॥
कविता: आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
पेंटिंग: लवकुश कुमार, कक्षा ५, अपना घर


शनिवार, 9 मई 2009

कविता: चुनमुन चिड़िया


चुनमुन चिड़िया
आओ बच्चों सुनो कहानी।
एक था राजा थी रानी॥
रानी ने एक चिड़िया पाली।
शक्ल की थी वो भद्दी काली॥
कद में तो वह छोटी थी।
पर कुप्पे सी मोटी थी॥
गले में था चमड़े की पट्टी।
काम में थी वो हट्टी - कट्टी॥
मक्के की रोटी खाती थी।
फुर्र से वो तब उड़ जाती थी॥
कविता: रामकृष्ण , कक्षा , अपना घर
पेंटिंग: अशोक कुमार, कक्षा , अपना घर