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शनिवार, 2 जून 2012

कविता :- मशीनी दुनिया

कविता :- मशीनी दुनिया
दुनिया आगे बढाती जा रही....
नई-नई तकनीकि बना रही,
दिमाग लगा कम्प्यूटर बना दिया....
और आसमान जहाज उड़ा दिया,
आज इस मशीनी दुनिया में....
इन्सान का नहीं अब काम रहा,
ऐसी ऐसी मशीन बन गई....
हर काम मशीन करती हो जहाँ,
कम्प्यूटर इन्टरनेट से तो अब....
दूर-दूर तक बाते हो जाती,
कैसे होता है ये सब....
बात ये समझ न आती,

नाम : धर्मेन्द्र कुमार
कक्षा : 9 
अपना घर

मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011

कविता : दीपावली

 दीपावली 

दीपावली का है आया त्यौहार  ,
खुशियाँ खूब मनाया इस बार ....
घर के चारो ओर हैं दिए जलाए ,
लेकिन पटाखा छुडाना नहीं मुझे भाये ....
हर एक इस दीपावली में ,
करोड़ों पटाखे हैं बनते ....
दीपावली के इन पटाखों से ही ,
जाने कितने बच्चे हैं मर जाते ....
बच्चों, दीपावली तुम खूब मनाना,
लेकिन पटाखे तुम कभी मत छुडाना ...
दीपक जलाना और खूब मिठाई खाना,
साथ में मिलकर खुशियाँ खूब मानाना ....
लेखक : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर 
 

शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2010

कविता छोटे पौधे

छोटे पौधे
छोटे पौधे कितने अच्छे ,
फूल लागे हैं कितने ....
गेंदा गुलाब हैं फूल अनेक,
बगीचे में लगते हैं सब इक....
पौधे हमें लगते अच्छे,
कितने प्यारे कितने अच्छे ....
कलियाँ खिलती खिलता फूल,
छोटे पौधे कितने अच्छे.....
पौधे हमें लगते अच्छे ,
कलियाँ खिलती खिलता फूल ....
कितने अच्छे लगते फूल....
लेख़क धर्मेन्द्र कुमार कक्षा अपना घर कानपुर