कविता :- सागर कुमार बाल कवितायेँ बाल कहानियां बाल गीत किस्से कहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कविता :- सागर कुमार बाल कवितायेँ बाल कहानियां बाल गीत किस्से कहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 12 अगस्त 2012

शीर्षक :- कैसी ये जिन्दगी है

शीर्षक :- कैसी ये जिन्दगी है 
कैसी ये जिन्दगी है.... 
कुछ समझ में नहीं आता, 
रात दिन सुबह शाम.... 
सिर्फ पेट ही सबको भाता, 
सोचता हूँ कुछ पल.... 
दूसरों के  लिए जी लूं, 
पर ये पेट है जो मेरा पीछा नही छोड़ता.... 
और कहता पहले खुद के लिए जियो, 
फिर दूसरों के लिए जीना.... 
कैसी ये जिन्दगी है, 
कुछ समझ में नहींआता.... 
कवि : सागर कुमार 
कक्षा : 9 
अपनाघर 

सोमवार, 30 जुलाई 2012

शीर्षक :- जिन्दगी गोल है

शीर्षक :- जिन्दगी गोल है 
लगता है कि जिन्दगी एक वृत्त की तरह गोल है....
बस यूँ ही चलते जाओ, न होने को भोर है,
मैं सोचता हूँ कि कल मेरी जिन्दगी में....
एक भोर की किरण आयेगी,
और कुछ कर दिखलाने की चाह....
एक कोशिश की किरण,
मेरे दिलों में दिमाग में भर जाएगी....
पर क्या? करें जब सुबह की किरण आती है,
तो फिर आने वाला कल की जिन्दगी में....
अँधेरा ही अँधेरा ढला नजर आता है,
न कोई सुबह की किरण नजर आती है....
न आशा की उम्मीद नजर आती है,
बस रात दिन मेरे दिलों दिमाग में....
अँधेरा ही अँधेरा नजर आता है,
लगता है कि जिन्दगी एक वृत्त की तरह गोल है.... 
बस यूँ ही चलते जाओ जाओ न होने को भोर है,
कवि : सागर कुमार 
कक्षा : 9 
अपना घर