कविता : ज्ञान कुमार कहानियाँ बाल कवितायेँ बाल गीत किस्से कहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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गुरुवार, 17 मई 2012

कविता :- अधूरी आज़ादी

अधूरी आज़ादी 
जब-जब मिली है....
मुझे अधूरी आज़ादी,
तब-तब किया है....
मैंने समय की बर्बादी,
आज़ादी में नहीं लिया मैंने....
कई सारी किताबों का ज्ञान,
आज़ादी में ही मैंने लगा दिया....
खेलने और मस्ती में ध्यान,
जब एक दिन आज़ादी ख़त्म हुई....
तब मुझे समझ में आया,
आज़ादी में सुधरते है लोग....
आज़ादी में बिगड़ते हैं लोग,
जैसा मन में चाहोगे....
वैसा ही बन जाओगे,
नाम : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 8 
अपना घर 

सोमवार, 26 मार्च 2012

कविता : मन

 मन 

घूम के क्यों आ जाता है ,
सपने सबके भुला जाता है ......
नींद में भी ख़्वाब आता है,
आँखे खोलते ही गायब हो जाता है .....
सो जाने पर चला जाता मन,
गाँव-शहर घूम आता मन .....
घूम के क्यों आ जाता है ,
सपने सबके भुला जता है......

लेखक : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 8
अपना घर  

बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

कविता : इलेक्शन

 इलेक्शन 

जब कोई कुछ सोचता है ,
अपने मन को ही क्यों नोचता है ......
अब आ गये हैं इलेक्शन ,
इस इलेक्शन में देखो क्या होता है .....
गरीब-अमीर है बन जाता ,
उतने में ही वह खुश हो जाता .....
पहले इलेक्शन में क्या होता था ,
जनता सोच समझकर वोट देती थी ......

लेखक : ज्ञान कुमार 
कक्षा :8
अपना घर    

बुधवार, 27 जुलाई 2011

कविता : सरकार को शायद नहीं पता

सरकार को शायद नहीं पता 

हर एक चौराहों पर ,
खड़े हैं पुलिशवाले.....
चौराहों की चौकी में बैठकर,
पूंछते हैं अपनी जन्म कुंडली......
 उनकों शायद यह नहीं पता कि,
चौराहों पर लग गयी है वाहनों की मंडली....
सरकार को भी शायद यह नहीं पता ,
पुलिशवाले किसको रहें हैं सता ..... 

लेखक : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 8
अपना घर 

मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

कविता : भूल

     भूल 

हवा जोर से चलती है ,
चिड़िया उसमें उड़ती है....
हवा में एक दिन उड़ी धूल ,
उस दिन चिड़िया से हो गयी भूल....
उड़ना था आकाश में ,
पहुँच गयी पाताल में ....
हवा जोर से चलती है ,
चिड़िया उसमें उड़ती है....
लेखक : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 7
अपना घर