बुधवार, 11 अप्रैल 2012

कविता : चीटीं रानी

चीटीं रानी
चीटीं रानी चीटीं रानी....  
चिंता में क्यों पड़ी हो,
कण-कण जोड़-जोडकर हरदम....
रात दिन करती हो श्रम,
कभी नहीं करती आराम....
सबसे मिलकर रहती हो,
गर्मी जाड़ा हरदम सहती हो....
हम भी मेहनत करना सीखे,
हिल मिल कर हम रहना सीखे....
चीटीं रानी चीटीं रानी,  
चिंता में क्यों पड़ी हो.... 
नाम :जीतेन्द्र कुमार 
कक्षा :8 
अपना घर

1 टिप्पणी:

"रुनझुन" ने कहा…

बहुत ही अच्छी और शिक्षाप्रद कविता...!!!