रविवार, 18 सितंबर 2011

कविता : प्रकृति के रस गान

 प्रकृति के रस गान 

संसार है अपना कितना अनमोल ,
कितना अच्छा है हम लोगों का भुगोल.....
इस संसार में तरह-२ के जन्तु पाए जाते,
जो हम लोगों को सुंदर गीत सुनाते....
हरी भरी दुनियाँ है हमारी,
इसमें होती हैं फसलें प्यारी....
कृषी प्रधान है देश हमारा,
किसानों से प्यार करने वाला.....
जहाँ गंगा माँ जैसी नदी है बहती,
वहाँ की धरा खूब उपजाऊ है होती.....
संसार है अपना कितना अनमोल,
कितना अच्छा है हम लोगों का भुगोल....

लेखक : मुकेश कुमार 
कक्षा :10
अपना घर  

1 टिप्पणी:

"रुनझुन" ने कहा…

प्रकृति का सुन्दर रस गान!!!