गुरुवार, 15 सितंबर 2011

कविता - भ्रष्टाचार


भ्रष्टाचार
 आज के इस भ्रष्ट समाज  में ,
 भ्रष्टाचार से त्रस्त समाज में .....
हो गया हैं जीना मुश्किल ,
छाये हैं देश में कई अखिल,
भ्रष्टाचार से मुक्ति के पाना ......
अन्ना का समर्थक करते जाना,
एक बार देखो करके समर्थन ......
अन्ना का तो करके दर्शन ,
जान लोकपाल से होगे तुम मुक्त......
नेता सभी होगे जायेगे दुरुस्त ,
अन्ना हैं इस देश का सहारा .....
सुधरेगा अब ये देश हमारा .......
लेख़क -सोनू कुमार
कक्षा -१० अपना घर ,कानपुर

1 टिप्पणी:

"रुनझुन" ने कहा…

सुन्दर रचना! हम भी उम्मीद करतें हैं कि ऐसा ही होगा...