गुरुवार, 25 अगस्त 2011

कविता - रोटी

  रोटी
रोटी तो भाई रोटी हैं ,
रोटी का अलग इतिहास हैं.....
रोटी का हैं कितना महत्त्व हैं,
काम केवल करते हैं रोटी के लिए.....
मरते हैं जीते हैं रोटी के लिए ,
लडडू पेडा खाने से केवल मन भरेगा ....
रोटी सब्जी खाने से पेट भरेगा ,
रोटी को भिन्न भिन्न नामों से जाना जाता हैं......
रोटी को चपातियाँ .कुलचा .फुलके ,रोगन ,
के नाम से पुकारा जाता हैं .....
रोटी तो मनुष्य की जान हैं,
रोटी तो मनुष्य का भगवान हैं.....
रोटी तो हमारी तो भूख मिटाती हैं,
 रोटी हमें काम करने के लिए उर्जा देती हैं .....
रोटी तो भाई रोटी हैं कितनी अनोखी रोटी हैं ......

लेख़क- मुकेश कुमार
कक्षा - १० 
अपना घर कानपुर

2 टिप्‍पणियां:

vidhya ने कहा…

aati utam

"रुनझुन" ने कहा…

रोटी की सच्चाई को बखूबी बयाँ करती सुन्दर रचना...