गुरुवार, 4 अगस्त 2011

कविता - हर उमगों से

हर उमगों से 
 मन की हर उमगों से ,
 ये जीवन भरा हैं तरंगो से.....
 हर एक की अपनी उमगें,
निकल रही उसमें तरंगें .....
 कैसी हैं हर उमगें ,
 नहीं निकलेगी ज्वाला की तरंगें.....
 मिला दो उसमे ऐसी उमगें ,
  मिट जाए  उसकी तरंगें .....
 मन की हर उमगों से ,
ये जीवन भरा हैं तरंगों......

 लेखक - अशोक कुमार 
कक्षा - ९ अपना घर, कानपुर

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत दिन बाद आज आकर फिर अच्छा लगा!!!

"रुनझुन" ने कहा…

सचमुच जीवन भरा है तरंगों से ....अच्छी कविता!