चारो हो गए गंजा
चार थे पण्डे।
खाते थे रोज अंडे॥
चारो गए स्कूल।
स्कूल में की शैतानी॥
टीचर को हो गई हैरानी।
टीचर ने मारा दो - दो अंडा॥
चारो के मुंह से निकल पड़ा अंडा।
फ़िर चारो गए पंजाब॥
पंजाब में बिल्ली ने मारा पंजा।
चारो का सर हो गया गंजा॥
चार थे पण्डे।
खाते थे रोज अंडे॥
चारो गए स्कूल।
स्कूल में की शैतानी॥
टीचर को हो गई हैरानी।
टीचर ने मारा दो - दो अंडा॥
चारो के मुंह से निकल पड़ा अंडा।
फ़िर चारो गए पंजाब॥
पंजाब में बिल्ली ने मारा पंजा।
चारो का सर हो गया गंजा॥
कविता: चंदन कुमार, कक्षा ३, अपना घर