देखो मच्छर की टांगे चार।
काटे तो हम हो जाए बीमार॥
फैले बीमारी मलेरिया हैजा।
रोटी खाने में न आए मजा॥
पड़े रहे फ़िर घर के अन्दर।
काम न करने जा पाए बाहर॥
मच्छर गंदे पानी में रहते।
रुके पानी में हरदम पलते॥
घूम - घूम को रात को काटे।
बीमारी एक दूजे को बांटे॥
पानी साफ हमेशा रखना।
सब बच्चों का यही है कहना॥
जो मच्छर को दूर भगाओगे।
फ़िर तन मन अच्छा पावोगे॥
कविता: मुकेश कुमार , कक्षा ७, अपना घर
पेंटिंग: आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
काटे तो हम हो जाए बीमार॥
फैले बीमारी मलेरिया हैजा।
रोटी खाने में न आए मजा॥
पड़े रहे फ़िर घर के अन्दर।
काम न करने जा पाए बाहर॥
मच्छर गंदे पानी में रहते।
रुके पानी में हरदम पलते॥
घूम - घूम को रात को काटे।
बीमारी एक दूजे को बांटे॥
पानी साफ हमेशा रखना।
सब बच्चों का यही है कहना॥
जो मच्छर को दूर भगाओगे।
फ़िर तन मन अच्छा पावोगे॥
कविता: मुकेश कुमार , कक्षा ७, अपना घर
पेंटिंग: आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
