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सोमवार, 21 जून 2010

कविता पेड़ के नीचे

पेड़ के नीचे
एक पेड़ के नीचे ,
पौधे में खरगोश पानी सीचे.....
एक पेड़ में बैठा था,
रोज गाजर खाता था....
नहीं किसी से बताता था,
एक दिन किसान आया....
साथ में अपने तलवार लाया,
चुपके से खरगोश के पास गया.....
पूछा तुम्हारा काम हो गया,
बन्दर ने कहा नहीं.....
किसान ने कहाँ रुक यही,
निकली अपनी तलवार.....
कर दिया उस पर वार,
एक पेड़ के नीचे....
पौधे में खरगोश पानी सीचे......
लेखक मुकेश कुमार कक्षा अपना घर कानपुर

शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

कविता -माचिस की तीली

माचिस
माचिस की तीली है बड़ी अलबेली ,
काम करती है अकेली ........
नहीं किसी से मदद लेती ,
सबको रोशनी है देती ..........
उसकी एक तीली पर ,
उसकी एक चिंगारी पर ........
आग जल जाती है ,
खाना बनाने में वह मदद करती है ...
घर में आग लगती है ,
मृत्य शरीर को जलती है .........
एक माचिस की तीली पर,
दुनिया जल जाती है ..........
लेकिन इसका एक उपाय है,
जो हमारे पास है...............
आग अगर लग जाती है ,
पानी उसे बुझाती है ..........
आग को शांत कराती है ,
माचिस की तीली है बड़ी अलबेली ,
काम करती है अकेली ..............
लेखक :मुकेश कुमार "उत्साही "
कक्षा :८
अपना घर ,कानपुर