कविता :- जितेन्द्र कुमार बाल कविताएं बाल कहानियाँ बाल गीत किस्से कहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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शनिवार, 25 अगस्त 2012

शीर्षक:- बाग बगीचे और खेत

शीर्षक:- बाग बगीचे और खेत 
अगर न होते बाग-बगीचे....
और न होते खेत,
कहाँ से आता सब्जी गेहूं....
कैसे भरता पेट,
इसलिए किसान उगाता....
सब्जी गेंहू धान,
इन्ही को खाकर पेट....
करता है आराम,
तभी तो मिलती है ऊर्जा....
जिससे शरीर है करता रहता काम,
अगर न होते बाग-बगीचे....
और न होते  खेत,
कवि:- जितेन्द्र कुमार 
कक्षा:- 9 
अपना घर 

मंगलवार, 21 अगस्त 2012

शीर्षक :- कैसे सूरज उगता है

शीर्षक :- कैसे सूरज उगता है 
पूरब का दरवाजा खोला....
धीरे-धीरे सूरज उगता,
नारंगी रंग का दिखता है....
ऐसे सूरज उगता है,
सारी चिड़ियाँ गाती है....
खिलती कलियाँ सारी है,
दिन भर सीडी चढ़ता है....
जैसे सूरज बढ़ता है,
लगते है सभी कामों में मन....
आलस में न रहता तन,
धरती गगन धमकता है....
सूरज जैसे चमकाता है,
गर्मी कम हो जाती है....
धूप थकी सी जाती है,
सूरज आगे चलता है....
जैसे सूरज ढलता है,
कवि:- जीतेन्द्र कुमार 
कक्षा:- 9 
अपना घर

बुधवार, 25 जुलाई 2012

शीर्षक :- हुआ सवेरा

शीर्षक :- हुआ सवेरा 
हुआ सवेरा निकला सूरज....
शाम को पश्चिम को जाता,
जब-जब सूरज उगता है....
तब-तब फूल खिलते है,
फिर वे अपनी सुगंध को....
अपने चारों ओर फैलाते है,
बच्चे उसमे खूब खेलते है....
फिर हंसते मुस्काते है,
हुआ सवेरा निकला सूरज....
शाम को पश्चिम को जाता,
कवि : जितेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर