मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

कविता : अधूरी कविता

 अधूरी कविता 

कविता अब बन नहीं रही !
शब्द अब कोई मिल नहीं रहे !!
जब बैठता हूँ मैं कविता लिखने !
तो मन मचल उठता है कहीं और !!
सोचा मैने देख लूँ कुछ पुरानी कवितायेँ !
सीख लूँ कुछ उनसे जान लूँ कुछ उनसे !!
नहीं आया समझ में कुछ !
तो लिख डाला !!
कुछ टूटे-फूटे शब्दों से !
फिर एक अधूरी कविता !!

लेखक : ज्ञान कुमार 
कक्षा : 8
अपना घर 
 

1 टिप्पणी:

संतोष कुमार ने कहा…

बहुत सुंदर

कभी हमारे मचान पर भी आइये !