मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

कविता -भारत बसता हैं गाँव में

शीर्षक  -भारत बसता हैं गाँव में
पीपल का पत्ता ,
लगता जैसे कपड़ा का लत्ता.....
वह हमेशा रहता हिलता ,
२४  घंटे सबको आक्सीजन देता .....
दिखता हमें हरा भरा ,
कोंपे खाने में लगती गरी छुहारा......
गंगा की पावन धार से ,
पवित्र हैं यह भारत हमारा......
हरे पीपल के पत्तो की छाँव में ,
हमारा भारत बसता हैं मेरे में ....
लेख़क - आशीष कुमार 
कक्षा - ८ 
अपना घर, कानपुर

3 टिप्‍पणियां:

Sunil Kumar ने कहा…

सही कहा आपने पीपल हमारे लिए बहुत उपयोगी है और भारत तो गाँव में बसता है सुंदर रचना , बधाई

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर कविता

Mukesh Kumar Mishra ने कहा…

पीपल हमारे लिये बहुत ही उपत्योगी है।
सुन्दर कविता.........
लिखते रहो.............