सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

शीर्षक - खिली कलियाँ

शीर्षक - खिली कलियाँ
आयी आमो की मजरियां ,
खिल रही हैं फूलों की कलियाँ ..... 
उसमे तितलियाँ गाती हैं गीत ,
मधुमक्की संग मिल जाती हैं ....
दोनों आपस में  मिल कर रहती हैं,
तितली और मधुमक्की हैं दोनों दोस्त .....
नहीं किसी को देती हैं दुख ,
आयी आमों की  मजरियां ......
लेख़क - चन्दन कुमार 
कक्षा -५ 
अपना घर, कानपुर

2 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

सुंदर कविता .....

mendis ने कहा…

good poem