रविवार, 16 जनवरी 2011

कविता :धोबी की कमाई गधे ने जान गवाई


धोबी की कमाई गधे ने जान गवाई


एक गधे की सुनो कहानी ।
सुनते ही होगी सबको हैरानी ॥
एक बार था जब गधा बीमार ।
फिर भी धोबी ने लादे कपड़े पूरे हजार ॥
हिलता-डुलता गधा बेचारा ।
धोबी ने न दिया उसको उस दिन चारा ॥
क्योंकि गधा था उस दिन बीमार ।
उसने न ढोये थे धोबी के कपड़े दस हजार ॥
इस पर धोबी ने गधे पर बेरहमी ढाई ।
धोबी के कार्यों में गधे ने अपनी जान गंवाई ॥
धोबी की तो हो गई खूब कमाई ।
लेकिन गधे की जान यमराज ले गए भाई ॥

लेख़क :आशीष कुमार
कक्षा :8
अपना घर

3 टिप्‍पणियां:

अरूण साथी ने कहा…

अजी यह गदहा कौन है... सुन्दर

चैतन्य शर्मा ने कहा…

मजेदार कविता

Shah Nawaz ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुति... आशीष कुमार को बहुत-बहुत शुभकामनाएं!