बुधवार, 5 जनवरी 2011

कविता :तबला समझ खूब बजाया

तबला समझ खूब बजाया

एक घर की सुनो कहानी ,
जासूसी करती थी उन सब की नानी .....
नानी थी तो बिल्कुल पतली-दुबली ,
जैसे तलवार की धार हो नोकी पैनी वाली .....
वह जिसके पास है जाती ,
उसके पैरों तले जमीन खिसकती .....
एक दिन नाना जी को गुस्सा आया ,
नानी की खोपड़ी को तबला समझ खूब बजाया .....

लेख़क :आशीष कुमार
कक्षा :8
अपना घर

3 टिप्‍पणियां:

મલખાન સિંહ ने कहा…

नानी के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था.

http://mydunali.blogspot.com/

माधव( Madhav) ने कहा…

i agree with above

चैतन्य शर्मा ने कहा…

सच में नानी के साथ ऐसा क्यों...