रविवार, 5 सितंबर 2010

कविता रक्षाबंधन

रक्षाबंधन
राखी आयी राखी आयी,
भाई ने बहनों के हाथो से राखी बंधवायी....
राखी नहीं ये हैं रक्षाबंधन,
कभी न टूटे भाई बहन के रिश्तों का बंधन....
रक्षाबंधन का पर्व सभी मानते ,
हिन्दू हो या मुस्लिम सभी इसके गाते गुण....
श्रावण माह की तिथि में इसे मानते,
भाई अपनी बहनों को रक्षा का आशीष देते....
हर पर्व सभी के लिए खुशियाँ लाते,
वह सभी के मन को हर्षाते.....
लेखक आशीष कुमार कक्षा अपना घर कानपुर

6 टिप्‍पणियां:

Sonal ने कहा…

sundar kavita.....

A Silent Silence : Shamma jali sirf ek raat..(शम्मा जली सिर्फ एक रात..)

Banned Area News : It's difficult to recreate same emotion in remake: Aamir

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

आज 31/07/2012 को आपकी यह पोस्ट (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति मे ) http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!

कविता रावत ने कहा…

बहुत सुन्दर प्यारी प्रस्तुति
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामना

"रुनझुन" ने कहा…

बहुत प्यारी कविता !!!

Rahul Jadhav ने कहा…

Raksha bandhan ek naya tyohar............... Bhai Bahan ka pyar lekar aa raha dulhar.. raksha bandhan ek tyohar...

बेनामी ने कहा…

maderchod gand marunga teri saale bhsdi ke