मंगलवार, 21 सितंबर 2010

कविता देखो आसमान में उड़ रही पतंगे

देखो आसमान में उड़ रही पतंगे
देखो भाई कितनी रंग बिरंगी पतंगे ,
उड़ रही आसमान में ये सारी पतंगे....
आसमान में सभी पतंगों को उड़ाते...
जब पतंगे कट जाती हैं,
लडके सब दौड़ -दौड़ कर लूटने जाते....
नहीं इनकी होती कीमत जादा,
एक दो रुपये में मिल जाती अच्छी -अच्छी पतंगे...
लोग इनको खूब उड़ाते,
और बच्चे करते मौज मस्ती....

लेख़क चन्दन कुमार कक्षा अपना घर कानपुर

5 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत ही मजेदार और प्यारी कविता...... धन्यवाद चन्दन भैया आपका

रानीविशाल ने कहा…

बहुत अच्छी कविता .....आभार
नन्ही ब्लॉगर
अनुष्का

माधव ने कहा…

बहुत अच्छी कविता

Chinmayee ने कहा…

बहुत अच्छी कविता है

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

पतंग उड़ाने के साथ-साथ पढ़ना भी होगा!
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आपकी पोस्ट की चर्चा तो यहाँ भी है!
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http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/09/18.html