बुधवार, 16 सितंबर 2009

कविता: थाली और गिलास

थाली और गिलास

एक थी थाली एक था गिलास,
खाने में मिलते हरदम साथ...
हर घर में वे रहते साथ,
एक दूजे से करते बात...
एक दिन थाली की आई बारात,
चम्मच कटोरी जमके नाचे साथ...
दूल्हा बन ठुमके थे गिलास,
दोनों की शादी हो गई साथ...
एक थी थाली एक था गिलास,
खाने में मिलते हरदम साथ
....
लेखक: जमुना कुमार, कक्षा ४, अपना घर

1 टिप्पणी:

creativekona ने कहा…

Afasos ki ham na the thalee --gilas kee shadee men.varna ham bhee kuchh thumake lagaa hee dete.---achchhee rachana.Jamuna ji aise hee likhate rahiye.
HemantKumar