शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009

कविता:- चूहा और बिल्ली


चूहा और बिल्ली
जब बच्चों ने देखा चूहा।
अपने बिल में भागा चूहा॥
बिल्ली ने चूहा को देखा।
चूहा ने बिल्ली को देखा॥
बिल्ली भागी उसके पीछे।
डर के चूहा भागा बिल में॥
बच्चें दौड़ें बिल्ली के पीछे।
बिल्ली भागी अपने घर में।।
जब बच्चों ने देखा चूहा।
चूहा भागा अपने बिल में॥
ज्ञान कुमार
अपना घर, कक्षा 5




2 टिप्‍पणियां:

chandan ने कहा…

बहुत ही अच्छी कविता है,
पढकर मुझे मेरा बचपन याद आ गया । बहुत ही सुंदर कविता है, ।

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

चूहा और बिल्ली
जब बच्चों ने देखा चूहा।
अपने बिल में भागा चूहा॥
बिल्ली चीखी म्यायु म्यायु

सुंदर अच्छी कविता है,
पढकर मुझे बचपन याद आ गया