बुधवार, 15 अप्रैल 2009

कविता:- आम


आम

बात है बहुत पुरानी।
सुनो तो आएगा मुँह में पानी।।
पेड़ों में आम लगे थे।
हम उसके नीचे खड़े थे॥
इतने में हवा का झोंका आया।
आम टप से नीचे आया॥
मैंने झट से उसको पाया।
मुँह में मेरे पानी आया॥
धोकर मैंने उसको खाया।
खाने में बड़ा मजा आया॥
अशोक कुमार
अपना घर, कक्षा 6

2 टिप्‍पणियां:

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

पर अभी 1 माह तक इस पानी से ही काम चलाना पडेगा।

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तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

Dipti ने कहा…

बहुत ही अच्छा ब्लॉग है।