कविता :-अशोक कुमार बाल कवितायें बाल कहानियां बाल गीत किस्से कहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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गुरुवार, 26 जुलाई 2012

शीर्षक :- सपनो की दुनिया

शीर्षक :- सपनो की दुनिया 
सपनो की दुनिया में....
अपनों की क्या जरुरत है,
ख़ुशी भी होती....
जब हर पल घूमने की,
कल्पना होती है....
उस समय अँधेरे में भी,
दिन नजर आता है....
पहाड़ी से कूदने में,
बड़ा मजा आता है....
बहती हुई नदी की,
कल्पना होती है....
सपनो की बात जब,
दोस्तों से होती है....
तो उस पल की हंसी की,
कोई सीमा नहीं होती है....
जब अगले दिन मिलते है,
तो फिर सपनो की बात होती है....
हर दिन एक नई,
कहानी की शुरुआत होती है....
वह दिन सबके लिए खास होता है,
सबके पास अपने-अपने....
दो चार सपने होते है,
सपनो की दुनिया में....
अपनों की क्या जरुरत है,
ख़ुशी भी होती है....
जब हर पल घूमने की,
कल्पना होती है....
कवि : अशोक कुमार 
कक्षा : 10 
अपना घर

मंगलवार, 19 जून 2012

शीर्षक :- मन में कोई बात नहीं

शीर्षक :- मन में कोई बात नहीं 
फकीर कहें या गरीब कहें....  
या पेट का मरीज कहें,
रोजा का कोई दोष नहीं....
मन में कोई चाहत नहीं,
मन में ऐसी कोई बात नहीं....
करने की कुछ आजादी नहीं,
जाने को कहीं बीमारी नहीं....
पढ़ने में कोई आहट नहीं,
मन में कोई चाहत नहीं....
मन में ऐसी कोई बात नहीं,
बनने की जो चाहत....
घर में इसका कोई जवाब नहीं,
कहें क्या खुद से....
मन न लगे बुक में,
मन में कोई चाहत नहीं....
बुक पास में, लेकिन पढ़ने की कोई चाहत नहीं,
कवि : अशोक कुमार 
कक्षा : 10 
अपना घर