कविता
हर मौसम का अपना अंदाज है
इस अंदाज में खुद की घुली हुई अपनी पहचान है
गर्मी हो या सर्दी या हो वसंत
सबकी अपनी अदा है
हर मौसम खुद के संग घुली हुई तशरीफ़ लाता है
सबका अपना पसंदीदा मौसम होता है
हर मौसम का अपना अंदाज है
इस अंदाज में खुद की घुली हुई अपनी पहचान है
गर्मी हो या सर्दी या हो वसंत
सबकी अपनी अदा है
हर मौसम खुद के संग घुली हुई तशरीफ़ लाता है
सबका अपना पसंदीदा मौसम होता है
हर मौसम का अपना अंदाज है
नाम - नरेंद्र
( अपना घर )
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