कविता
ये खूबसूरत प्रकृति में
कैसे बिखर रही है लालिमा
श्रंगार करती दिख रहि है
शुशोभित है कितना
देखो खिलखिलाती फूलों को
हरी भरी सुकुमार कलियों को जिसकी सुगंध में डूब रही
जगमगाती जुगनू को भी
दिख रही है खूबसूरत
रत की रानी चाँद अपनी
कैसे बिखर रही है लालिमा
श्रंगार करती दिख रहि है
शुशोभित है कितना
देखो खिलखिलाती फूलों को
हरी भरी सुकुमार कलियों को जिसकी सुगंध में डूब रही
जगमगाती जुगनू को भी
दिख रही है खूबसूरत
रत की रानी चाँद अपनी
कैसे बिखर रही है लालिमा
श्रंगार करती दिख रहि है नाम -शिवा
कक्षा 10
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