"मैं एक , राह दो मेरे "
क्या लेकर चलु ?
चलूँगा नए दिशा में जब ,
कितने दिन का सफ़र में होगा |
चलूँगा नए अंदाज में जब
क्या करना होगा ?
अज़नवी सी रहो में,
दर उत्पन होगा नजूकसेमन में
या रोना पढ़ेगा या कतराना होगा |
अंतिम तक जाने में,
मैं एक , रह दो मेरे रह |
कवि : गोविंदा कुमार , कक्षा :8th
अपना घर
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