बुधवार, 8 दिसंबर 2010

कविता: बचपन के रंग ....

बचपन के रंग ....

बचपन में माँ से लड़ना झगड़ना
उसके ही हाथों से रोटी फिर खाना
उसके साथ ही चलना और घूमना
गोदी में चढ़कर उसके मचलना
पापा से झट से पैसे ले लेना
पैसे से टाफी और इमली खाना
चिढ़ना-चिढ़ाना रोना-रुलाना
लुकना-छिपना हँसना-हँसाना
माँ की गोदी था प्यारा सा पलना
पकड़े जो कोई तो धोती में छिपना
ऐसा था प्यारा सा बचपन का रंग
गुजरा था जो मेरे माँ बाप के संग

अशोक कुमार , कक्षा , अपना घर

5 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर ....

vallabh ने कहा…

ashok beta! mera bachpan yaad dila diya tumne...

Akshita (Pakhi) ने कहा…

कित्ती प्यारी कविता...बधाई.

______________
'पाखी की दुनिया' में छोटी बहना के साथ मस्ती और मेरी नई ड्रेस

अशोक बजाज ने कहा…

बहुत सुंदर.बधाई !

vallabh ने कहा…

idhar kai din se baal sajag ki tem ne koi kavita nahi likhi, exams chal rahe hain kya?