मंगलवार, 15 सितंबर 2020

कविता : गर्मी- धीरे बढ़ते जा रहा है

 " गर्मी धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं "

गर्मी धीरे -धीरे बढ़ते जा रहे हैं ,

चारो और  पेड़ मुरझा  रहे हैं | 

कोरोना से दुख पा रहे हैं ,

गर्मी धीरे -धीरे बढ़ते जा रहे हैं | 

खुछ पौधे तैयार हो रहे हैं ,

गर्मी से हो रहे बेकार हो रहे हैं | 

एसी लिए अपना धीरज  खो रहे हैं ,

गर्मी धीरे-धीरे बढ़ते जा रहा है| 


कवि :  अजय कुमार ,कक्षा : 6th ,अपना घर

रविवार, 13 सितंबर 2020

कविता : खोया हूँ इस जहाँ पर

" इस जहाँ पर खोया हूँ "

 खोया हूँ इस जहाँ पर ,

चाँद- तारो के  पास | 

सूरज की रोशनी जैसे ,

लगते है तारे मिटमिटाते हुए | 

तारो की रोशनी देती राहत ,

सपने की दुनिया में न होती आहट  | 

खो जाता हूँ उस दुनिया में ,

सो जाता हूँ फूलो की कलियों में | 

खोया हूँ इस जहाँ पर ,

चाँद- तारो के पास | 


कवि  : महेश कुमार ,कक्षा : 6th ,अपना घर

 

 

 

 

शनिवार, 12 सितंबर 2020

कविता : ये कोरोना वायरस

 " ये कोरोना है एक वायरस "

ये कोरोना है एक वायरस  ,

जो फैला रहा देश पर आत्याचारी | 

लोगो में मच गई महामारी ,

जब  देश में कोरोना आया | 

हर मैदान और हर गली में सन्नाटा छाया ,| 

जब  से चीन ने कोरोना बटा | 

लोगो को सहना पड़ रहा मुशकिले ,

ये कोरोना है एक वायरस | 

जो  फैला रहा हैदेश में अत्याचारी,


कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर

गुरुवार, 10 सितंबर 2020

कविता : रक्षा बन्दन

" रक्षा बन्दन "

खिड़की के पास बैढे सोच ,

रहा था अच्छी सी बात | 

तभी मुझे याद आया ,

रचा बन्धन की बात | 

कलाई पर बंधेगी राखी ,

लगेगा भाई बहन है साथी |

 भाई -बहन के लिए है कितना खाश ,

भाई लगाए रहते है आश | 


कवि : अखिलेश कुमार ,कक्षा : 10th , अपना घर

बुधवार, 9 सितंबर 2020

कविता : जिसने हर दुख सुलझाया

" जिसने हर दुख  सुलझाया "

जिसने हर दुख को सुलझाया  ,

सही रास्ता पर चलना सिखाया | 

बच्चो में प्यार जगाया ,

 सभी के साथ हाथ बटाया | 

रोते हुए को हसना सिखाया ,

जिसने हर नियमो को पालन करना सिखाया | 

प्यार से हर बात बताया ,

सभी को  अच्छे रास्ते पर चलना सिखाया | 

जिसने हर दुख को सुलझाया ,

 सही रास्तो पर चलना सिखाया | 


कवि : अमित कुमार , कक्षा : 6th ,अपना  घर

मंगलवार, 8 सितंबर 2020

कविता : कोरोना तो धीरे -धीरे बढ़ते जा रहा हैं

" कोरोना तो धीरे -धीरे बढ़ते जा रहा हैं "

 कोरोना तो धीरे -धीरे बढ़ते जा रहा  हैं ,

पता नहीं ये कोरोना कब जयेगा | 

सब लोग मर रहे   हैं ,

कोरोना धीरे -धीरे बढ़ते जा रहा  हैं | 

कोरोना का दवा भी नहीं मिल पा  रहा हैं ,

कोरोना सबको मारते जा रहा हैं | 

कोरोना है एक बीमारी हैं ,

पता नहीं इस देश में क्या आया हैं | 

कोरोना से तो लड़ना है जंग ,

कोरोना तो धीरे -धीरे बढ़ते जा रहा हैं | 


कवि : रोहित कुमार कक्षा ,3rd ,अपना घर

शनिवार, 5 सितंबर 2020

कविता : कोरोना का बीमारी

" कोरोना का बीमारी "

कोरोना का बीमारी ,

बदल गया महामारी में | 

पूरे दुनिया परेशान हैं  ,

कोरोना सबकी निकली जान हैं  | 

गली -मोहल्ले बन्द  हैं ,

खाना -पीना बन्द  हैं | 

सब बेचारे बहुत परेशान है ,

कोरोना कर दिया दुनिया को खाली  | 

कोरोना का बीमारी ,

बदल गया महामारी में | 

 

कवि : कामता कुमार ,कक्षा 9th ,अपना घर

शुक्रवार, 4 सितंबर 2020

कविता : रात की चाँदनी में कटके तारे

" रात की चाँदनी में कटके तारे "

रात की चाँदनी अँधेरे में लटके तारे ,

संसार की जगत से देखो लगते प्यारे | 

 सोच में पड़ जाऊँ ये है कितने तारे ,

इसका जवाब देना मुश्किल है प्यारे | 

चाँद की रोशनी -रोशनी देते तारे ,

यू ही आकाश में घूमते बनके विचारे | 

काली अधिकार  की शोभा बढ़ते ,

सुबह होते ही गयाब हो जाते है | 

कितने सुन्दर लगेट है तारे ,

 बैढे बिस्तर पर नजरे निहारे | 


कवि : प्रांजुल  कुमार ,कक्षा : 11th ,अपना घर

गुरुवार, 3 सितंबर 2020

कविता : आओ चले कुछ सोचे

" आओ चले कुछ सोचे "

आओ चले कुछ सोचे ,

हाथ पर हाथ रख कर  बैठे |

जिंदगी में है तुम्हारे पास बहुत से कार्य,

इसीलिए नहीं करना तुम कभी आराम |  

जिस दिन जग गये  उसी दिन होगी शुरुआत ,

हर दिन अपना कार्य करते रहना | 

एक दिन जरूर लोगो तक फैलेगी तुम्हरी बात ,

उस दिन तुम्हरे लिए होगा खाश | 


कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

बुधवार, 2 सितंबर 2020

कविता : सबसे प्यारा देश हमारा

" प्यारा देश हमारा "

सबसे प्यारा देश हमारा ,

दुनिया में नाम है हमारा | 

कोमल धरती है इनके पावन ,

हर मौसम लगता है सावन | 

कल -कल है हर गलियों में ,

भर -भर भरा पानी हर नदियों में | 

हर तरफ है प्रकृति का नजारा ,

अपना भारत है सबसे न्यारा | 

जहा महक रही है हर जंगल ,

अब सोच रहे है हम मंगल | 

सबसे प्यारा देश हमारा ,

दुनिया में नाम है हमरा | 

 

कवि :कुलदीप कुमार ,कक्षा : 9th , अपना घर 

मंगलवार, 1 सितंबर 2020

कविता : मौसम भी क्या महरबान है

"मौसम भी क्या मेहरबान है "

 मौसम भी क्या मेहरबान है ,

चारो ओर बारिश ही है | 

हर तरफ है हरयाली छाई ,

इस गर्मी  मौसम में परिवर्तन है आई | 

इस मौसम में इंसान है  हुआ ,

ना हो बीमारी मुझे फिर बचकर यहां वहा | 

हर वकत डर -डर के जी रहा है ,

मौसम भी क्या मेहरवान है | 

चारो और बारिश की ही शान है ,

कवि :संजय कुमार ,कक्षा : 10th ,अपना घर