सोमवार, 10 अप्रैल 2017

कविता :खुशियाँ फिर आएंगी

खुशियाँ फिर आएंगी 

अपने घर भी खुशियां आएगी,
अपने घर भी रंग छाएगी | 
बस धैर्यता को साथ चाहिए ,
हर वो ख्वाब पूरे होंगें | 
हम खुशियों के रंग में झूमेंगें,
बस थोड़ा सा विश्वास  चाहिए,
एक दोस्त का साथ चाहिए | 
   अपने सपनों को सच कर  पायेंगें,
हम नई दुनियाँ बनायेंगें,
 फिर उसको दिल से सजायेंगे  | 
वो खुशियां फिर से आएंगी, 
अपने घर रंग छाएंगी | 
कवि देवराज कुमार ,कक्षा 7th अपना घर 

कवि का परिचय: देवराज "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये बिहार के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. देवराज यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 7th  के छात्र है। देवराज को कवितायेँ लिखना अच्छा लगता है। क्रिकेट के दीवाने है, विराट कोहली इनके पसंद खिलाड़ी  है। देवराज को डांस करना बहुत पसंद है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी।

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