बुधवार, 16 मार्च 2011

कविता : पहने घूमें हिन्दुस्तानी

 पहने घूमें हिन्दुस्तानी 

हिन्दुस्तान  की गलियों में ,
जगह-जगह पर बाजार है ....
जिसमें सबसे ज्यादा चाइनीज माल है ,
है आश्चर्य की बात अनोखी ....
है क्या हिन्दुस्तानी ,
नहीं किसी को इसकी जानकारी ....
बिकता कहाँ ? माल स्वदेशी ,
जिसको ले हिन्दुस्तानी ....
  जगह-जगह पर बिकता माल विदेशी,
जिसको पहने घूमें हर हिन्दुस्तानी ....

लेखक : अशोक कुमार 
कक्षा :8
अपना घर 

2 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

सुंदर सन्देश लिए कविता

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया.