बुधवार, 4 अगस्त 2010

कविता :वीर बनो

वीर बनो

वीर बनो तुम वीर बनो ।
पढ़-लिखकर शूर वीर बनों ॥
पढ़ लिखकर अच्छा काम करोगे ।
जग में अपने माँ-बाप का नाम करोगे ॥
और लोगों को अच्छी सीख दोगे ।
छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाओगे ॥
तुम किसी बच्चे को अगर पढ़ाना ।
उसे सरकारी स्कूल की तरह मत रटवाना ॥
दो चार दिन तो याद रहेगा ।
अभ्यास करने से पूरा जीवन याद रहेगा ॥
यह जीवन बड़ी मुश्किल से मिलता है ।
जिसने इसको खोया यह तो असली मूर्खता है ॥

लेखक :आशीष कुमार, कक्षा :, अपना घर

4 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

अभ्यास करने से पूरा जीवन याद रहेगा ॥

" बहुत ही प्यारा संदेश "

good luck

माधव ने कहा…

सुन्दर

Akshita (Pakhi) ने कहा…

यह तो बहुत अच्छी कविता है...
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'पाखी की दुनिया' में 'लाल-लाल तुम बन जाओगे...'

Rahul Singh ने कहा…

8 वीं कक्षा के बच्‍चे की यह अभिव्‍यक्ति सहज नहीं लगती, जरा भारी जान पड़ती है.