शनिवार, 16 मई 2026

चल अपनी मंजिल को ढूंढ

 कविता 

चल अपनी मंजिल को ढूंढ 
खोई हुई अपनी किस्मत को ढूंढ 
कोई साथ नहीं होगा फिर भी 
पीछे छूटे वक्त को ढूंढ 
चल अपनी मंजिल को ढूंढ
पानी -पानी हो जाएगा जमाना 
ठहरा हुआ वक्त भी बढ़ेगा जहाँ 
तेरी ऊंचाइयों को देख ये आसमान भी झुकेगा यहां 
कबतक यूँ खड़ा पछतायेगा 
कितने आंसू बहायेगा 
गमो का ये साया भी उठेगा देखना 
एक दिन मंजिल तुम्हे भी मिलेगी देखना 
जो हुआ उसे छोड़ो अब 
जो बीत गया उसे भूलो अब 
बेहतरीन पलों को ढूंढ 
चल अपनी मंज़िल को ढूंढ 
नाम-साहिल कुमार 
कक्षा -10 
(अपना घर )

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