कविता
क्या पूरा हो गया सफर तेरा
इस कदर तू वही है ठहरा
जिसने देखा हो मुकाम का चेहरा
उम्मीदे सारी छोड़ - छाड़
यूँ ही राहों पर रहा गिरा
जिसके हर क़दमों पर
खिल रहे हों घाव गहरा
सुना मुसाफिर यह है की
तुम तो हो वो नवीन सितारे
चमक रहा जो एक किनारे
जिसके खातिर हर एक अखियाँ
हो बेचैन सारी दिशा निहारे
तेरे आगमन के स्वागत में
हर कोई बस तुझे ही ताके
ये मुसाफिर
तो लौटोगे लिए उजाले ?
नाम -पिंटू कुमार
कक्षा -11
(अपना घर - आशा ट्रस्ट )
कानपूर
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