शुक्रवार, 15 मई 2026

क्या पूरा हो गया सफर तेरा

                                            कविता                                             
क्या पूरा हो गया सफर तेरा 
 इस कदर तू वही है ठहरा 
जिसने देखा हो मुकाम का चेहरा 
उम्मीदे सारी छोड़ - छाड़ 
यूँ ही राहों पर रहा गिरा 
जिसके हर क़दमों पर 
 खिल रहे हों घाव गहरा 
सुना मुसाफिर यह है की 
तुम तो हो वो नवीन सितारे 
चमक रहा जो एक किनारे 
जिसके खातिर हर एक अखियाँ 
हो बेचैन सारी दिशा निहारे 
तेरे आगमन के स्वागत में  
  हर कोई बस तुझे ही ताके 
 ये मुसाफिर 
तो लौटोगे लिए उजाले ?
नाम -पिंटू कुमार 
कक्षा -11 
(अपना घर - आशा ट्रस्ट )
कानपूर 

कोई टिप्पणी नहीं: