शनिवार, 10 अक्तूबर 2015

हिंदी

आओ बच्चो सीखे हम 
हिंदी को दे नया जन्म 
क ख ग सीखेगे हम 
फिर हिंदी को हम करे नमन 
ये तो हिंदी की पुकार है 
जो जिन्दगी के उस पार है 
फिर भी हम दिल से कहते है 
ये तो वर्णों का हार है 
वर्ण मिलने से ही बनते शब्द 
जो बोलते है हमारे लब्ज



                                                             प्रन्जुल कुमार 
                                                                  कक्षा -6
                                                      अपनाघर ,कानपुर  

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (12-10-2015) को "प्रातः भ्रमण और फेसबुक स्टेटस" (चर्चा अंक-2127) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

BAL SAJAG ने कहा…

रूपचन्द्र शास्त्री जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद की आपने हम बच्चों के इस प्रयास को अपने ब्लाग पर चर्चा की ..
नितीश
संपादक
बाल सजग