सोमवार, 26 अक्तूबर 2009

कविता: पृथ्वी है अनमोल

पृथ्वी है अनमोल

सभी ग्रहों में से पृथ्वी है अनमोल,
पृथ्वी पर कई तरह के होते है बल...
घर्षण बल के कारण चलते- फिरते,
घर्षण बल कम करने से आगे बढ़ नही पाते...
गुरुत्त्वा कर्षण बल पृथ्वी में होता,
यह सभी को अपनी ओर खीचता....
नही किसी को यह दिखता,
अपना कार्य स्वंय यह करता...
पृथवी पर सब कुछ है मिलता,
सूरज, चंदा, तारे, आसमान पास में दिखता...
छोटे नन्हे मुन्ने पौधे पृथ्वी पर उगते,
जो हरदम सबको ऑक्सीजन देते ...
ऑक्सीजन से ही हम जीवित रहते,
कार्बनडाई आक्साइड पौधों को देते...
सभी ग्रहों में पृथ्वी है अनमोल,
नीली सुंदर दिखती गोल...
क्या देगा इसका कोई मोल,
इससे करो कोई खेल ...

लेखक: आदित्य कुमार, कक्षा , अपना घर

1 टिप्पणी:

संजय भास्कर ने कहा…

कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
बहुत सुन्दर रचना । आभार

ढेर सारी शुभकामनायें.

SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com