रविवार, 13 मई 2018

कविता : माँ

" माँ "

माँ तू कितनी प्यारी है, 
दुनिया से तू न्यारी है | 
सारा दिन करती है घर का काम, 
कभी नहीं करती है तू आराम | 
सुबह उठाकर चली है जाती, 
मेरे लिए गरमा गरम नाश्ता बनाती | 
मुझको तू रोज़ नया सिखाती,
नया संसार का रास्ता दिखाती |
 क्या सच है तू मुझे बताती,
चोट लगने पर मरहम लगाती | 
माँ तू कितनी प्यारी है, 
दुनिया से तू न्यारी है |

कवि : संतोष कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर 

3 टिप्‍पणियां:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

मदर्स डे की हार्दिक शुभकामनाओं सहित , आज सलिल वर्मा जी ले कर आयें हैं ब्लॉग बुलेटिन की २०५० वीं पोस्ट ... तो पढ़ना न भूलें ...

" जिसको नहीं देखा हमने कभी - 2050वीं ब्लॉग-बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Meena Sharma ने कहा…

सुंदर कविता

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुन्दर