सोमवार, 4 जनवरी 2010

कविता - तैयार

तैयार
हम रहते हैं हमेशा तैयार ।
परीक्षा में नंबर लायेंगे हजार ॥
हम अपने वतन का नाम लेगे बार- बार ।
हम रहते हैं हमेशा तैयार ॥
हम लोगों से कहवायें बार- बार ।
जय- जय भारत महान ॥
हम अपने सर-जमीं के है पूरा हक़दार ।
चाहें मिट जाएँ चाहें लुट जाएँ ॥
लेकिन वतन का झंडा नहीं देगें गिरने एक भी बार ।
परीक्षा में नम्बर लायेंगे हजार ॥
अपने वतन का नाम लेगें बार- बार ।
हम रहते हैं हमेशा तैयार ॥

3 टिप्‍पणियां:

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

अच्छी कविता !

नारदमुनि ने कहा…

good luck.narayan narayan

परमजीत बाली ने कहा…

बढ़िया कविता है।बधाई।