सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

कविता: "क्यों मज़दूर इतना मज़बूर रहता है"

"क्यों मज़दूर इतना मज़बूर रहता है" 
लिख दूँ तो क्या समझ लोगे। 
बोलूँ अगर तो क्या सुन लोगे ।। 
बनाए उनके रास्ते से तो गुजरेंगे । 
पर मेहनत की अहमियत नहीं समझेंगे ।। 
हर मज़दूर खुद से यह सवाल पूछता है । 
क्यों खुद अमीर - गरीब में फर्क रखता है ।। 
इमारते ईटो और पत्थरो से सजाता है । 
हर खतरा सहकर एक महल खड़ा करता है ।। 
क्यों मज़दूर इतना मज़बूर रहता है । 
टूटती उम्मीद और बिखरता साहस ।। 
ये सारी खामियाँ लेकर चलता है । 
गुजरा कल और आता भविष्य, भूल जाता है ।। 
क्यों मज़दूर इतना मज़बूर रहता है । 
क्यों मज़दूर इतना मज़बूर रहता है ।। 
उनकी बनाए हुए माकन पर हम रहते है । 
आते - जाते रास्ते में एक नहीं हजार बार मिलते है ।। 
पर कोई उनका इज्ज़त नहीं करना जनता है । 
न जाने क्यों इमारते ईटो और पत्थरो से एक मज़दूर ही क्यों सजता है ।। 
क्यों मज़दूर इतना मज़बूर रहता है । 
क्यों मज़दूर इतना मज़बूर रहता है ।। 
कवि: साहिल कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"

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