रविवार, 15 फ़रवरी 2009

कविता:- चुहिया रानी

चुहिया रानी
चुहिया रानी चुहिया रानी
तुम तो बड़ी सयानी
किसी की पकड़ नही आती हो
उछल कूद कर बिल में घुस जाती हो
चुहिया रानी चुहिया रानी
तुम तो हो बड़ी सयानी

मु० चंदन तिवारी,

कक्षा ३, अपना घर

2 टिप्‍पणियां:

Rahul Kumar Singh ने कहा…

निश्‍छल, सहज और मासूम अभिव्‍यक्ति.

anupani zalke ने कहा…

eak ghdhe ki suno kahani
usne ki keasi shetani
jab hoti thi rat ghni
tab karta tha nit feri