बाल सजग

(बच्चों का आकाश .... बच्चों के लिए)

गुरुवार, 21 मई 2026

गर्मी से क्या हो जाता है

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 कविता  गर्मी से क्या हो जाता है  जो पंखा भी काम सही से  नहीं करता  और गर्मी में पानी भी नहीं बरसता  ख़त्म  हुए पेडों की वजह  ये बढ़ती गर्मी  ...
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बुधवार, 20 मई 2026

क्या है ये ?

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 कविता  क्या है ये ? मन नहीं कहीं  क्या है  करना नहीं कुछ ? भांग हो गया सब  क्यों इतना तू तंग हो गया ? बेताब है बे  गुस्सा है तू ? क्या कर ल...
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सोमवार, 18 मई 2026

तबाही मचा रही है ये गर्मी

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 कविता  तबाही मचा रही है ये गर्मी  चल रही हैक केवल गर्मी की मर्जी  सब सोच रहे होंगे की  की कब आएगा ये सर्दी  क्योंकि तबाही मचा रहा है ये गर्...
शनिवार, 16 मई 2026

चल अपनी मंजिल को ढूंढ

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 कविता  चल अपनी मंजिल को ढूंढ  खोई हुई अपनी किस्मत को ढूंढ  कोई साथ नहीं होगा फिर भी  पीछे छूटे वक्त को ढूंढ  चल अपनी मंजिल को ढूंढ पानी -पा...
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शुक्रवार, 15 मई 2026

क्या पूरा हो गया सफर तेरा

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                                            कविता                                               क्या पूरा हो गया सफर तेरा    इस कदर तू वही ...
बुधवार, 13 मई 2026

मां तेरी याद आ गयी

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 कविता  मां तेरी याद आ गयी    बचपन की वो पुरानी यादें  मेरे मन में छा गयी  मन तेरी याद आ गयी आ गयी  तेरी  वो  मीठी बोली  और वो प्यारी प्यारी...
शनिवार, 9 मई 2026

खूब इस्तमाल किया लोगो ने

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कविता खूब इस्तमाल किया लोगो ने  जो सीधे थे उनको भी खूब लुटा   इस शहर के लोगो ने  गरीबी  को पहला हथियार बनाया  गरीबो को पहले लुटा  इन्हे ही प...
गुरुवार, 7 मई 2026

बस थोड़ी ही देर की बात है

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 कविता  बस थोड़ी ही देर की बात है  ये वक्त भी गुजर जाएगा  थोड़ी सी परेशानी होगी ज़रूर   पर ये भी संभल जायेगा  शायद कोई  भुज भी होगा  और ख़ुशी जा...
बुधवार, 6 मई 2026

राजा महाराजा बन गया

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कविता  राजा महाराजा बन गया  राज्य राजधानी बन गया  कानून गले का फन्दा बन गया  उन्न्ति के नाम पर  इंसान इंसानियत भूल गया  राजा महाराजा बन गया ...
मंगलवार, 5 मई 2026

हम जितना पेड़ बचाएंगे

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कविता  हम जितना पेड़ बचाएंगे  न पेड़ को काटेंगे न तोडेंगे  जितना चाहे हो सके  हम सब पेड़ बचाएंगे  क्योंकि अब की यह गर्मी  लोगों को करेगा परेशान...
शनिवार, 2 मई 2026

ये खूबसूरत प्रकृति में

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कविता  ये खूबसूरत प्रकृति में कैसे बिखर रही है  श्रंगार करती दिख रही है  देखो खिलखिलाती फूलो को  हरी भरी सुकुमार कलियो में  जिसकी सुगन्ध में...
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BAL SAJAG
Kanpur, UP, India
प्यारे दोस्तों, बाल सजग एक हकीकत भरा प्रयास जिसके लिए हम सभी बच्चें कोशिश में लगे है. हमारे सपने, हमारी उमंगे हमको भी चाहिए एक जमीन जो हमारी हो, जिसके लिए किसी का मुहँ न देखना पड़े. हम भी लिखना चाहते है, सोचना चाहते है और घिसी-पिटी पढाई को छोड़ नया कुछ पढ़ना चाहते है, जो हमारे दोस्तों ने लिखा हो, जो हमने लिखा हो. बाल सजग एक ऐसा ही प्रयास है. हम सभी ईट-भठ्ठों पर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चें है. हमारे बचपन का अधिकतर समय ईट की पथाई में गुजरा है, दहकतियों भठियों में झुलसा है. ईट-भठ्ठों की तपिश में न मालूम मासूम बचपना कंहा खो गया. हमको नहीं मालूम की जांत- पात, उंच - नीच क्या होती है, और हम जानना भी नहीं चाहते है ... हम जानना चाहते है कि, शेर खीरा ककड़ी क्यों नहीं खाता, आसमान के तारों पर कौन रहता है. हम सब कुछ जानना चाहते है, जो हमारे मन में आते है. तमाम ख्वाब आपके है ,पर कुछ हमारे भी है. हम अपने ख़्वाबों को आपके साथ जीना चाहते है. .. "बाल सजग" टीम
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