बाल सजग

(बच्चों का आकाश .... बच्चों के लिए)

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

कविता: " क्यों इतनी जल्दी आ जाते हो सूरज जी ?"

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 " क्यों इतनी जल्दी आ जाते हो सूरज जी ?" क्यों इतनी जल्दी आ जाते हो सूरज जी ?  बच्चे सही सो नहीं पाते है।  हम जैसे बच्चे को अभी सो...
बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

कविता: "उदास बैठा मेरा यार"

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"उदास बैठा मेरा यार"  न जाने मेरा आज मुझसे क्यों उदास अलग बैठा है।  आज कल मेरा दोस्त बात भी करना बंद कर दिया है।।  बात करो तो आँखे...
मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

कविता: "काले बादल"

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" काले बादल " आने लगे है अब काले बादल। आसमा अब काला हो चूका है  । । गरज रहे है बादल आसमा में  । बिजली भी चमक रही है जोर - जोर से  ...
सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

कविता: "क्यों मज़दूर इतना मज़बूर रहता है"

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" क्यों मज़दूर इतना मज़बूर रहता है "  लिख दूँ तो क्या समझ लोगे।  बोलूँ अगर तो क्या सुन लोगे  । ।  बनाए उनके रास्ते से तो गुजरेंगे  ।...
रविवार, 1 फ़रवरी 2026

कविता: "अँधेरी रात हो रही है"

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"अँधेरी रात हो रही है" अँधेरी रात हो रही है।   न जुगनू है न तारे है आसमा में  । ।  ऐसा क्यों लगता है की चाँद का मुखड़ा नराज़ सा है ?...
शुक्रवार, 30 जनवरी 2026

कविता: "महात्मा गाँधी"

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"महात्मा गाँधी" हमें एक आज़ाद परिन्दा कह कर चले गए है।  हर साल हमें याद दिलाता है  । । सच बोलना भी सिखाया है  । हिन्सा राह पर चलना ...
गुरुवार, 29 जनवरी 2026

कविता: "समय आ गया है"

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"समय आ गया है " शुरू होने वाली है वार्षिक परीक्षा।  मन को संभालना है  । । शुरू होने वाली है वार्षिक परीक्षा  । अब पढ़ाई में मन लगान...
मंगलवार, 27 जनवरी 2026

कविता: "लड़को की जिम्मेदारी"

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" लड़को की   जिम्मेदारी " घर में बड़े हो या छोटे।  वे अपनी जिम्मेदारी समझते  । ।  नकारते नहीं कभी न कभी पीछे हटते है  ।  जितना हम सम...

कविता: "बड़ा भाई"

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"बड़ा भाई" पिता का प्यार देता है वो।  सारी परेशनियाँ झेलता है वो। ।  घर का बड़ा है ।  इसलिए सारी जिम्मेदारियाँ सम्भालता है वो । ।  क...
रविवार, 25 जनवरी 2026

कविता: "मेरी भी जिम्मेदारी है"

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" मेरी  भी  जिम्मेदारी है " मेरी भी जीवन कि एक कहानी है।  उनमे से एक भाग  जिम्मेदारी है। । पढ़ाई करना या लापवाही करना, ये मुझे खुद ...
शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

कविता: "क्रिकेट का दिन"

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"क्रिकेट का दिन" चलेंगे क्रिकेट खेलने ।   कोशिश करंगे जीतने  की  । । हार तो हमें मंजूर नहीं है  । जी - जान लगा देंगे इस खेल में  ।...
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BAL SAJAG
Kanpur, UP, India
प्यारे दोस्तों, बाल सजग एक हकीकत भरा प्रयास जिसके लिए हम सभी बच्चें कोशिश में लगे है. हमारे सपने, हमारी उमंगे हमको भी चाहिए एक जमीन जो हमारी हो, जिसके लिए किसी का मुहँ न देखना पड़े. हम भी लिखना चाहते है, सोचना चाहते है और घिसी-पिटी पढाई को छोड़ नया कुछ पढ़ना चाहते है, जो हमारे दोस्तों ने लिखा हो, जो हमने लिखा हो. बाल सजग एक ऐसा ही प्रयास है. हम सभी ईट-भठ्ठों पर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चें है. हमारे बचपन का अधिकतर समय ईट की पथाई में गुजरा है, दहकतियों भठियों में झुलसा है. ईट-भठ्ठों की तपिश में न मालूम मासूम बचपना कंहा खो गया. हमको नहीं मालूम की जांत- पात, उंच - नीच क्या होती है, और हम जानना भी नहीं चाहते है ... हम जानना चाहते है कि, शेर खीरा ककड़ी क्यों नहीं खाता, आसमान के तारों पर कौन रहता है. हम सब कुछ जानना चाहते है, जो हमारे मन में आते है. तमाम ख्वाब आपके है ,पर कुछ हमारे भी है. हम अपने ख़्वाबों को आपके साथ जीना चाहते है. .. "बाल सजग" टीम
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