बाल सजग

(बच्चों का आकाश .... बच्चों के लिए)

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

गर्मी का मौसम अब ढल रही है

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कविता  गर्मी का मौसम अब ढल रही है  और ठण्ड का मौसम अब बढ़  रहा है  ठंडी के मौसम में खूब मूंगफली खाएंगे  ठण्ड में गर्मी पाएंगे  ठण्ड  का मौसम ...
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026

न गर्मी बौराती इस पल

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 कविता  न गर्मी बौराती इस पल  न होती चिपचिपी बरसात इस दिन  सुस्त हवा है साथ साथ  कोमल सी है धुप आज  क्या बात है  वातावरण में है कुछ खास आज स...
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

दिन में हुआ हल बेहाल

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 कविता  दिन में हुआ हल बेहाल  कीपोंकी भाई आ गया गर्मी के दिन  जब दिनभर एक ही चीज  दिखती है वह है सूरज  चमक उठा  है सूरज  अब सूरज की होने वाल...
बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

वीर क्रन्तिकारियों में था दम

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 कविता  वीर क्रन्तिकारियों में था दम  दिल्ली के विधानसभा में फेंका था बम  १३ अप्रीलक में हुआ था जलियांवाला में हुआ था कांड  आज भी है दीवारों...
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

दशहरा के दिन आ रहा है

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कविता  दशहरा  के दिन आ रहा है  जोरदार तैयारी लोग बना रहा है  जगह जगह पर लगा रहे है पंडाल  जल्द ही आने वाला है दशहरा के दिन  पुरे मेले में शो...
शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

पड़ते पड़ते आ गयी ठंडी

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कविता  पड़ते पड़ते आ गयी ठंडी  कुछ पता नहीं चला  पड़ते पड़ते ठंडी आ गयी  कुछ पता नहीं चला  मेने सपनो में सोचा था  ठंडी जल्दी आ गया  वो भी हमको प...
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026

समय है कीमती

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कविता  समय है कीमती  इसे इस्तेमाल करो  और खुद विश्वास करो  और मंजिल की तलाश करो  समय ही रास्ता दिखता है  समय ही वक्त बताता है  समय ही मंजिल ...
गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

कुछ भी कहते हो तुम

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 कविता  कुछ भी कहते हो तुम  जरा गौर किया करो अपने शब्दों  पर तेरी उन बातों पर मेरा मन ढोल गया  मई अपना नाम जानकर भी उसे भूल गया  कुछ भी ङ्कह...
बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

रोको मत आगे बढ़ने दो

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कविता    रोको मत आगे बढ़ने दो  आज़ादी के दीवानो को  हम मात्राभूमि की सेवा में  अपना सर्वस्व त्यागेंगे  हम उन वीरों के बच्चे है  जो दिल से बिलक...
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

सुबह की किरणे जब पृथिवी पर पड़ती

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 कविता  सुबह की किरणे जब पृथिवी पर पड़ती  आसमान में लालिमा बिखराती  अपनी मनोरम दृष्टि से  संसार को चमकती  अपनी तेज ऊर्जा  पृथिवी पर बरसाती  स...
शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

पढ़ते पढते ठंडी आ गया

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 कविता  पढ़ते पढते ठंडी आ गया  कुछ पता नहीं चला  पढते पढते ठंडी आ गया  कुछ पता नहींचला   सपनो में सोचा की  ठंडी कितनी जल्दी आ गया  वो भी हमको...
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BAL SAJAG
Kanpur, UP, India
प्यारे दोस्तों, बाल सजग एक हकीकत भरा प्रयास जिसके लिए हम सभी बच्चें कोशिश में लगे है. हमारे सपने, हमारी उमंगे हमको भी चाहिए एक जमीन जो हमारी हो, जिसके लिए किसी का मुहँ न देखना पड़े. हम भी लिखना चाहते है, सोचना चाहते है और घिसी-पिटी पढाई को छोड़ नया कुछ पढ़ना चाहते है, जो हमारे दोस्तों ने लिखा हो, जो हमने लिखा हो. बाल सजग एक ऐसा ही प्रयास है. हम सभी ईट-भठ्ठों पर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चें है. हमारे बचपन का अधिकतर समय ईट की पथाई में गुजरा है, दहकतियों भठियों में झुलसा है. ईट-भठ्ठों की तपिश में न मालूम मासूम बचपना कंहा खो गया. हमको नहीं मालूम की जांत- पात, उंच - नीच क्या होती है, और हम जानना भी नहीं चाहते है ... हम जानना चाहते है कि, शेर खीरा ककड़ी क्यों नहीं खाता, आसमान के तारों पर कौन रहता है. हम सब कुछ जानना चाहते है, जो हमारे मन में आते है. तमाम ख्वाब आपके है ,पर कुछ हमारे भी है. हम अपने ख़्वाबों को आपके साथ जीना चाहते है. .. "बाल सजग" टीम
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