बाल सजग

(बच्चों का आकाश .... बच्चों के लिए)

सोमवार, 30 मार्च 2026

A step out of the world

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 POEM  Don't follow the crowd  Make a path which could led the crowd  Do the things you and your heart want's  Nothing is impossible...
शनिवार, 21 मार्च 2026

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कविता  किसी  को किसी राह की मोड़ पर  मिली वह चीज अनोखी सी  चली कूछों के मन  तोड़ कर  तो किसी -किसी की है जोड़ती  वह न जाने क्या क्या कहते  जाल ...
शनिवार, 14 मार्च 2026

कविता: "बचपन में बहूत ख्वाइशें थीं"

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" बचपन में बहूत ख्वाइशें थीं " बचपन में बहूत ख्वाइशें थीं  पर बढ़ती उम्र में घटती चली गयी  डॉक्ट,पुलिस और इंजीनियर में जाना था  पर ...
शुक्रवार, 13 मार्च 2026

कविता "दिन ढलने को चला नहीं की"

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" दिन ढलने  को चला नहीं की"  दिन ढलने  को चला नहीं की  वो हमारे पास आ गए  बातें करके  पूरा समय निकालकर   हमें हंसाकर चले गए   वो क...
मंगलवार, 10 मार्च 2026

ज़िंदगी तो पलभर का है

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कविता  ज़िंदगी तो पलभर का है  कभी ख़ुशी का तो कभी दुखी का है  कब बीत जाये पता ही नहीं  क्या हो जाये खबर ही नहीं  खो जये कब क्या ये पता ही नहीं...

कविता: "इंतजार"

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"इंतजार"  न जाने मेरी इन नजरो को, कैसी किशोरी लुभा गई जो पलकों को झपका भर मानो  इसारे से मुझे हका गई  पगली मुझे ये क्यों इस तरह तु...
रविवार, 8 मार्च 2026

हर गली में हर डगर में

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 कविता  हर गली में हर डगर में  कहीं किसी राह के कोने में  मिलती  नई ज़िंदगी पड़ी यूँ उलझे चौराहों  में  जल गयीं क्या सारी कीताबें  या खो गयी क...

अब हो गया ठंडी ख़त्म

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कविता  अब हो  गया ठंडी  ख़त्म  अब बस गर्मी ही गर्मी  रज़ाई हो गयी अब अंदर  अब कोहरा का नाम नहीं  सब हर तरफ खुला आसमा  अब ठंडी हो गया ख़त्म  अब ...
शुक्रवार, 6 मार्च 2026

कविता "शांति"

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"शांति" मेरे नजरों के सामने  फसलों  घेरे में  उसके आगे थोड़े  थोड़े से पीछे भी  मशीनों की ा रही बेसुर आवाज़  जिससे चली गयी कोसो दूर  ...
गुरुवार, 5 मार्च 2026

"पहले देखा था माँ ने वो दिन "

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"कविता"  पहले देखा था माँ ने वो दिन  जब दुनिया लगती थी पूरी हरी भरी  जब से बढ गए लोग  तब से लगी दुनिया ख़तम पेडो से पूरी पहले देखा ...
सोमवार, 2 मार्च 2026

कविता: "क्या आपने जिंदगी देखी है"

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"क्या आपने जिंदगी देखी है" थक कर चूर हो गए।  शरीर  भी झुलस गए अब ।।  आँखों में समुन्दर था ।  वो भी बह गए सब ।।  आशा तो बहुत थी उनस...
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BAL SAJAG
Kanpur, UP, India
प्यारे दोस्तों, बाल सजग एक हकीकत भरा प्रयास जिसके लिए हम सभी बच्चें कोशिश में लगे है. हमारे सपने, हमारी उमंगे हमको भी चाहिए एक जमीन जो हमारी हो, जिसके लिए किसी का मुहँ न देखना पड़े. हम भी लिखना चाहते है, सोचना चाहते है और घिसी-पिटी पढाई को छोड़ नया कुछ पढ़ना चाहते है, जो हमारे दोस्तों ने लिखा हो, जो हमने लिखा हो. बाल सजग एक ऐसा ही प्रयास है. हम सभी ईट-भठ्ठों पर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चें है. हमारे बचपन का अधिकतर समय ईट की पथाई में गुजरा है, दहकतियों भठियों में झुलसा है. ईट-भठ्ठों की तपिश में न मालूम मासूम बचपना कंहा खो गया. हमको नहीं मालूम की जांत- पात, उंच - नीच क्या होती है, और हम जानना भी नहीं चाहते है ... हम जानना चाहते है कि, शेर खीरा ककड़ी क्यों नहीं खाता, आसमान के तारों पर कौन रहता है. हम सब कुछ जानना चाहते है, जो हमारे मन में आते है. तमाम ख्वाब आपके है ,पर कुछ हमारे भी है. हम अपने ख़्वाबों को आपके साथ जीना चाहते है. .. "बाल सजग" टीम
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