कविता
कुछ भी कहते हो तुम
जरा गौर किया करो अपने शब्दों पर
तेरी उन बातों पर मेरा मन ढोल गया
मई अपना नाम जानकर भी उसे भूल गया
कुछ भी ङ्कह्ते हसो तुम
तेरी इन बातो पर मेरा मन चंचल होता है
मन मने या न मने फिर भी पिघलता है
तेरी तसवीर मेरे मन कोने में कहीं कैद है \
इसका भी कोई फयदा नहीं
क्योंकि उसका कोई वजूद नहीं
नाम- नीरू
कक्षा - 10
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